आप सब ने कभी न कभी स्लीपर के डिब्बे में यात्रा की होगी । मेरा स्लीपर के डिब्बे से कुछ विशेष लगाव है , शायद बचपन से अब तक इतनी बार स्लीपर में यात्रा कर चूका हूँ की तन मन सब स्लीपर हो गया है. एक बार AC में भी गया , पर सर घूमने लगा, समझ नहीं आया की सर टिकट के दाम कारन घूम रहा है या किसी और वजह से। खैर , स्लीपर पे आते हैं। अगर किसी को भारतवर्ष के बारे में जानना हो तो स्लीपर से अच्छी जगह नहीं हो सकती , ये अंग्रेज बेकार में हिमालय और जंगलों के चक्कर लगाते हैं , असली भारत तो स्लीपर में बसता है ! गांव के दद्दा जब तक अपने जूते उतार के पंखे के ऊपर नहीं रख देते , तब एक उन्हें नींद नहीं आती। जूते देख के आप के मन में ये प्रश्न उठ सकता है की इसे चुराएगा कौन ? पर दद्दा को इनसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता , उनके लिए जूते और तिजोरी एक सामान है। एक और प्रजाति जो बहुधा डिब्बों में पाई जाती है वो है WT यानी की without ticket . जैसे की जंगल में हिरन होता है ना !! बड़ी बड़ी आँखों वाला, डरा सहमा प्रा...
Pen is more powerful than sword!!