वैसे मेरे बड़े सारे मित्र मेरी बातो से सहमत नही होंगे , फिर भी मैं अपने विचार आपके सामने रखता हूँ। सावरकर का विरोध मुखत्या दो बातो पे होता है। १. मुस्लिम विरोधी : अगर हम सावरकर का मुस्लिम विरोध के कारन बहिष्कार कर सकते हैं , तो फिर हमें बाबा साहब आंबेडकर के मुस्लिमो के बारे में विचार को भी एक बार गूगल कर के देख लेने चाहिए। मैं मुस्लिम विरोधी होने का समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन एक बात को दो अलग अलग व्यक्तियों के लिए नजरिया रखना मेरी नजर में ठीक नहीं २. अंग्रेजो से माफ़ी जिस जेल में सावरकर को रखा गया , वहां शायद हम चंद दिन भी ना बिता पाएं , वहां लगभग एक दशक निकाल देना कठिनतम काम है , तर्क है की ऐसे बहुत से नेता हैं , जिन्होंने उससे ज्यादा समय बिताया , जैसे की नेल्सन मंडेला। ऐसी तुलना को मैं सही नहीं मानता , क्योंकि हर व्यक्ति की परिस्थितिया अलग होती हैं। अगर आप बिस्मिल की आत्मकथा पढ़ेंगे , तो उसमे ऐसे कई जगह बिस्मिल को ऐसा लगा की शायद उन्होंने इस लड़ाई में शामिल हो के गलती कर दी. इन दो बातो के कारन आप सावरकर के संघर्ष को न तो झुटला सकते हो , न इतिहास से म...
बचपन से बस यही पढ़ा और गुना की भारत विश्व का सर्वश्रेस्ठ देश है , और भारतीय सभ्यता और संस्कृति विश्व की सर्वश्रेस्ठ संस्कृति रही है !स्कूल में कंठस्थ किया , कई वाद विवाद प्रतियोगिताओ में अवार्ड जीते भारतीय संस्कृती को विश्व की सर्वश्रेस्ठ संस्कृति का पहरेदार बनकर। गर्व से सीना फूल जाता था , जब किसी बाहरी को हमारी सभ्यता संस्कृति की बड़ाई करते सुनता था , और खून भी खौल उठता था अगर किसी ने जरा भी पश्चिमी सभ्यता को हमसे श्रेस्ठ बताने की कोशिश की तो ! लेकिन आज उम्र के इस पड़ाव पे जहां 30 की गिनती शुरू हुई है , मैं ये कह सकता हूँ की जो लोग 'मेरा भारत महान ' के नाम पे गला फाड़ रहे हैं , वो या तो किसी मुगालते में हैं , या किस्मत से समाज में व्याप्त विकृतिओ से उनका सामना नहीं हुआ है भारत को महान न मानाने के मेरे पास कुछ कारन है , उनमे एक प्रमुख कारन है जातिवाद --------- मेरा ये प्यारा देश जाति में बांटा हुआ है ! लेकिन उससे क्या फर्क पड़ता है ? हाँ थोड़ा नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है , लेकिन और क्या ? क्या आप यही सवाल उस लाश के सामने ...