बचपन से बस यही पढ़ा और गुना की भारत विश्व का सर्वश्रेस्ठ देश है , और भारतीय सभ्यता और संस्कृति विश्व की सर्वश्रेस्ठ संस्कृति रही है !स्कूल में कंठस्थ किया , कई वाद विवाद प्रतियोगिताओ में अवार्ड जीते भारतीय संस्कृती को विश्व की सर्वश्रेस्ठ संस्कृति का पहरेदार बनकर।
गर्व से सीना फूल जाता था , जब किसी बाहरी को हमारी सभ्यता संस्कृति की बड़ाई करते सुनता था , और खून भी खौल उठता था अगर किसी ने जरा भी पश्चिमी सभ्यता को हमसे श्रेस्ठ बताने की कोशिश की तो !
लेकिन आज उम्र के इस पड़ाव पे जहां 30 की गिनती शुरू हुई है , मैं ये कह सकता हूँ की जो लोग 'मेरा भारत महान ' के नाम पे गला फाड़ रहे हैं , वो या तो किसी मुगालते में हैं , या किस्मत से समाज में व्याप्त विकृतिओ से उनका सामना नहीं हुआ है
भारत को महान न मानाने के मेरे पास कुछ कारन है , उनमे एक प्रमुख कारन है
जातिवाद
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मेरा ये प्यारा देश जाति में बांटा हुआ है ! लेकिन उससे क्या फर्क पड़ता है ?
हाँ थोड़ा नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है , लेकिन और क्या ?
क्या आप यही सवाल उस लाश के सामने पूछ सकते हैं , जिसे दूसरी जाति में प्यार करने के कारन , पेड़ से लटका के मर डाला गया !
जो खुशकिस्मत थे , वो इस दुनिया से चले गए , लेकिन बड़े बदनसीब इस दुनिया में अपने प्यार का ही गाला घोंट के जी रहे हैं ! क्योंकि इस समाज इस देश में अपने मर्जी से प्यार और शादी की आज भी इजाजत नहीं है !
परंपरा , इज्जत , संस्कार के नाम पर ये निर्णय लिया जाता है की आप किससे शादी करे और किससे नहीं !
इसके अलावा ऐसे लाखो लोग हैं , जो सिर्फ अपनी शादी इसलिए ढो रहे है , क्योंकि डरते हैं की क्या कहेंगे लोग , ये समाज !
समाज , जो लोगो को परंपरा और संस्कार के नाम पर घुट घुट के जीने को मजबूर कर दे , वो एक आधुनिक और महान कैसे हो सकता है
लोगो से समाज और समाज से देश बनता है , जिसका समाज इतना दकियानूसी सोच रखता हो , वो देश कैसे महान हो सकता है !
कुछ अन्य कारन भी है , जिनके बारे में कभी विस्तार से लिखूंगा , आज यहीं तक !
गर्व से सीना फूल जाता था , जब किसी बाहरी को हमारी सभ्यता संस्कृति की बड़ाई करते सुनता था , और खून भी खौल उठता था अगर किसी ने जरा भी पश्चिमी सभ्यता को हमसे श्रेस्ठ बताने की कोशिश की तो !
लेकिन आज उम्र के इस पड़ाव पे जहां 30 की गिनती शुरू हुई है , मैं ये कह सकता हूँ की जो लोग 'मेरा भारत महान ' के नाम पे गला फाड़ रहे हैं , वो या तो किसी मुगालते में हैं , या किस्मत से समाज में व्याप्त विकृतिओ से उनका सामना नहीं हुआ है
भारत को महान न मानाने के मेरे पास कुछ कारन है , उनमे एक प्रमुख कारन है
जातिवाद
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मेरा ये प्यारा देश जाति में बांटा हुआ है ! लेकिन उससे क्या फर्क पड़ता है ?
हाँ थोड़ा नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है , लेकिन और क्या ?
क्या आप यही सवाल उस लाश के सामने पूछ सकते हैं , जिसे दूसरी जाति में प्यार करने के कारन , पेड़ से लटका के मर डाला गया !
जो खुशकिस्मत थे , वो इस दुनिया से चले गए , लेकिन बड़े बदनसीब इस दुनिया में अपने प्यार का ही गाला घोंट के जी रहे हैं ! क्योंकि इस समाज इस देश में अपने मर्जी से प्यार और शादी की आज भी इजाजत नहीं है !
परंपरा , इज्जत , संस्कार के नाम पर ये निर्णय लिया जाता है की आप किससे शादी करे और किससे नहीं !
इसके अलावा ऐसे लाखो लोग हैं , जो सिर्फ अपनी शादी इसलिए ढो रहे है , क्योंकि डरते हैं की क्या कहेंगे लोग , ये समाज !
समाज , जो लोगो को परंपरा और संस्कार के नाम पर घुट घुट के जीने को मजबूर कर दे , वो एक आधुनिक और महान कैसे हो सकता है
लोगो से समाज और समाज से देश बनता है , जिसका समाज इतना दकियानूसी सोच रखता हो , वो देश कैसे महान हो सकता है !
कुछ अन्य कारन भी है , जिनके बारे में कभी विस्तार से लिखूंगा , आज यहीं तक !
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