कविता जी नहीं मैं कोई कविता कहने नहीं जा रहा हूँ । बल्कि कविता एक लड़की का नाम है , जो मेरे जेहन में कहीं बहुत अंदर परतों के नीचे दबी हुई है, शायद उसे मेरा नाम भी याद न हो , लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है , हम लड़को ने कब इस बात की फिक्र की है। मेरी कहानी उन लड़को की कहानी है , जिन्हे लड़कियां तो पसंद आ जाती हैं , पर या तो लड़कियों को वो पसंद नहीं आते ,या फिर कभी अपने दिल की बात कह नहीं पाते । भाग १ साल:2000 स्कूल : केंद्रीय विद्यालय जोरहट, असम मुझे याद है , जब पापा ने मुझे बोला की हम अब केन्द्रीय विद्यालय अम्बाला से ट्रांसफर ले के असम जा रहे हैं , मैं बहुत नाराज हुआ था, बहुत गुस्सा भी हुआ था । बालमन कभी समझ नहीं पाया की इसमें पापा का कोई दोष नहीं है , आर्मी में पोस्टिंग किसी के हाथ नहीं होती ! मैं बहुत ही भारी मन से अम्बाला से अपना नाम कटा के असम के लिए घर वालो के साथ निकला , एक ऐसी जगह , जिसके बारे में हमेशा गलत ही सुना , जिससे भी बताया उसने कहा की बड़ी ख़राब जगह जा रहे हो । मन बैठ जाता था सुन सुन के। खैर वो दिन भी आ गया जब मैंने जोरहट में क...
Pen is more powerful than sword!!