वैसे मेरे बड़े सारे मित्र मेरी बातो से सहमत नही होंगे , फिर भी मैं अपने विचार आपके सामने रखता हूँ। सावरकर का विरोध मुखत्या दो बातो पे होता है। १. मुस्लिम विरोधी : अगर हम सावरकर का मुस्लिम विरोध के कारन बहिष्कार कर सकते हैं , तो फिर हमें बाबा साहब आंबेडकर के मुस्लिमो के बारे में विचार को भी एक बार गूगल कर के देख लेने चाहिए। मैं मुस्लिम विरोधी होने का समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन एक बात को दो अलग अलग व्यक्तियों के लिए नजरिया रखना मेरी नजर में ठीक नहीं २. अंग्रेजो से माफ़ी जिस जेल में सावरकर को रखा गया , वहां शायद हम चंद दिन भी ना बिता पाएं , वहां लगभग एक दशक निकाल देना कठिनतम काम है , तर्क है की ऐसे बहुत से नेता हैं , जिन्होंने उससे ज्यादा समय बिताया , जैसे की नेल्सन मंडेला। ऐसी तुलना को मैं सही नहीं मानता , क्योंकि हर व्यक्ति की परिस्थितिया अलग होती हैं। अगर आप बिस्मिल की आत्मकथा पढ़ेंगे , तो उसमे ऐसे कई जगह बिस्मिल को ऐसा लगा की शायद उन्होंने इस लड़ाई में शामिल हो के गलती कर दी. इन दो बातो के कारन आप सावरकर के संघर्ष को न तो झुटला सकते हो , न इतिहास से म...
Pen is more powerful than sword!!